1 मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान, टोंक :- इस संस्थान की स्थापना 1978 में की गई थी। टोंक के नवाब मोहम्मद अली खाँ ने 1867 में लावा ठिकाने के ठाकुर रतसिंह को नजरबंद कर दिया तथा लावा पर आक्रमण कर दिया। लावा के प्रति नवाब की कार्यवाही से नाराज अंग्रेजों ने नवाब को गद्दी से उतारकर बनारस में कैदी की भांति रखा। नवाब ने बनारस में अरबी व फारसी ग्रंथों के संकलन का कार्य किया। मोहम्मद अली खाँ की मृत्यु के उपरांत उनके पुत्र अब्दुल रहीम खाँ इन ग्रंथों को टोंक ले आए। इन ग्रंथों की रक्षा के लिए ही स्वतंत्रता के उपरांत राज्य सरकार द्वारा इस संस्थान की स्थापना की गई। यहाँ की दुर्लभ पाण्डुलिपियों में औरंगजेब की लिखी “आलमगिरी कुरानेशरीफ तथा शाहजहाँ द्वारा तैयार करवाई गई “कुराने कमाल” बेजोड़ है। यहाँ पर 900 वर्ष पुराना एक शब्दकोश “अलगरीबेन” भी है जिसमें कुरान के कठिन शब्दों की व्याख्या की गई है। इस शब्दकोश को मिश्र में “मोहम्मद बिन अब्दुल्ला ने तैयार किया था। इसे वर्तमान नाम 1987 में प्रदान किया गया था।

2 राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर :- राजस्थान में साहित्य की उन्नति तथा साहित्यिक चेतना के प्रसार के लिए इस अकादमी की स्थापना 23 फरवरी, 1958 को उदयपुर में की गई थी। इस अकादमी द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार मीरा पुरस्कार है जो 1959-60 में प्रारम्भ किया गया था। इस अकादमी द्वारा “मधुमती” नामक पत्रिका का प्रकाशन किया जाता है।

3 राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर :- राजस्थानी भाषा एवं साहित्य को प्रोत्साहित करने के लिए इस अकादमी की स्थापना 1983 में बीकानेर में की गई थी। इस अकादमी द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार सूर्यमल्ल मिश्रण पुरस्कार है। इस अकादमी द्वारा “जागती जोत” नामक पत्रिका का प्रकाशन किया जाता है।

SUBJECT QUIZ

4 राजस्थानी पंजाबी भाषा अकादमी, श्रीगंगानगर :- राज्य सरकार द्वारा पंजाबी भाषा के संरक्षण व संवर्धन के मार्च 2006 में इस । अकादमी की स्थापना श्रीगंगानगर में की गई है।

5 राजस्थान संस्कृत अकादमी, जयपुर :- संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए 1981 में स्थापित इस अकादमी द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार माघ पुरस्कार है।

6 राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी, जयपुर :- ब्रजभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए 1986 में स्थापित इस अकादमी द्वारा “ब्रज शतदल” नामक पत्रिका का प्रकाशन किया जाता है।

Current Affairs

7 राजस्थान सिन्धी अकादमी, जयपुर :- 1979 में स्थापित, इस अकादमी द्वारा “रिहाण” नामक पत्रिका का प्रकाशन किया जाता है।

8 राजस्थान उर्दू अकादमी, जयपुर :- 1979 में स्थापित।

9 राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर :- विश्वविद्यालय स्तरीय मानक पाठ्यपुस्तकों एवं संदर्भ ग्रंथों के निर्माण प्रकाशन तथा हिन्दी भाषा के विकास के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968 के तहत 15 जुलाई, 1969 को इस एक स्वायत्तशासी संस्था के रूप में इस अकादमी की स्थापना की गई।

10 पं. झाबरमल शर्मा शोध संस्थान, जयपुर :- इस संस्थान की स्थापना सन् 2000 में की गई थी।

11 सरस्वती पुस्तकालय, फतेहपुर (सीकर) :- इस पुस्तकालय में 1801 में चीन में प्रकाशित पाऊल कारुस द्वारा लिखित “ए स्टोरी ऑफ बुद्धिस्थ फिलॉसफी” तथा 1908 में लिखित “लिंगविस्टिक सर्वे ऑफ इण्डिया” भी उपलब्ध है।

12 राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर :- यह एक साहित्यिक शोध संस्थान है, जिसकी स्थापना 1950 में जयपुर में की गई थी। 1958 में इसका मुख्यालय जोधपुर स्थानान्तरित कर दिया गया। इसके संस्थापक संचालक मुनि जिन विजय थे। मुनि जिन विजय की प्रेरणा से 1950 में जयपुर में संस्कृत मण्डल की स्थापना की गई। 1954 में इसका नाम बदलकर राजस्थान पुरातन मंदिर कर दिया गया। बाद में इसका स्थाई नाम राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान रखा गया।

13 राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर

14 महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र, जोधपुर :- इस केन्द्र की स्थापना 2 जनवरी, 1805 को महाराजा मानसिंह द्वारा की गई थी। इस शोध केन्द्र का प्रमुख लक्ष्य कला व संस्कृति के क्षेत्र में विद्यमान शोध सामग्री का अनुसंधान करना है।

15 अनूप लाइब्रेरी, बीकानेर :- बीकानेर नरेश अनूप सिंहजी द्वारा स्थापित इस पुस्तकालय में प्राचीन हस्तलिखित पुस्तकों का विशाल भण्डार स्थित है। वर्तमान में यह पुस्तकालय महाराजा गंगासिंह ट्रस्ट की देखरेख में लालगढ़ महल में संचालित है।

ONE LINER QUESTION ANSWER

16 राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी :- राजस्थानी भाषा में उच्च अध्ययन व अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए इस संस्थान की स्थापना 1955 में की गई थी। यहाँ राजस्थानी भाषा के हस्तलिखित व प्रकाशित ग्रंथों का संग्रह भी किया जाता है।

17 जगदीश सिंह गहलोत शोध संस्थान :- राज्य के प्रसिद्ध इतिहासकार श्री जगदीश सिंह गहलोत की स्मृति में इस संस्थान की स्थापना 1975 में जोधपुर में की गई थी।

18 जैन विश्व भारती :- लाडनूं में स्थापित यह संस्था जैन तेरापंथ के प्रचार-प्रसार का कार्य करती है। इसके संस्थापक आचार्य तुलसी थे। तुलसी प्रज्ञा यहाँ की मुख्य पत्रिका है।

19 भारतीय विद्या मंदिर शोध प्रतिष्ठान :- यह ग्रंथालय शोध प्रतिष्ठान के नाम से बीकानेर के रतनबिहारीजी मंदिर में 1957 में स्थापित किया गया था। इसका संचालन सेठ माधोदास मूंदड़ा ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।

20 राजस्थानी साहित्य कला परिषद, बालोतरा :- राजस्थानी भाषा व साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए इस संस्था की स्थापना 1975 में बालोतरा में श्री लाल चन्द पुनीत द्वारा की गई थी।

21 रूपायन संस्थान, बोरून्दा :- यह राज्य का एक महत्वपूर्ण लोक-सांस्कृतिक केन्द्र है। इसकी स्थापना 1960 में स्व. कोमल कोठारी व विजयदान देथा द्वारा की गई थी। इस संस्थान द्वारा ही बाताँ री फुलवारी ग्रंथ का प्रकाशन किया गया है। इस संस्थान द्वारा “लोक-संस्कृति” नामक मासिक पत्रिका का प्रकाशन भी किया जाता है।

22 सार्दूल राजस्थानी रिसर्च इन्स्टीट्यूट :- इस संस्थान की स्थापना बीकानेर में बीकानेर नरेश सार्दूल सिंह द्वारा 1944 में की गई | थी। इस संस्थान द्वारा “राजस्थानी भारती” नामक त्रैमासिक पत्रिका का प्रकाशन किया जाता है।

23 सीमान्त साहित्य कला परिषद, जैसलमेर :- इस संस्थान की स्थापना 1975 में श्री श्याम सुन्दर व श्रीनन्दकिशोर द्वारा जैसलमेर में की गई थी।

साहित्य से संबंधित विशिष्ट तथ्य :-
1 वजसेन सूरि रचित “भरतेश्वर बाहुबलि घोर” को राजस्थानी की प्राचीनतम रचना माना जाता है जो 1168 ई. के आसपास रची गई थी। मारु गुर्जर भाषा में रचित इस ग्रंथ में भरत व बाहुबलि के मध्य हुए युद्ध का वर्णन आता है।
2 शालिभद्र सूरि रचित “भरतेश्वर बाहुबलि दास” को संवतोल्लेख वाली प्रथम राजस्थानी रचना माना जाता है जो 1184 ई. में रची गई थी। यह रास परम्परा की पहली तथा सर्वाधिक विस्तृत पाठ वाली रचना है।
3 पाल्हण द्वारा मारु गुर्जर भाषा में रचित “नेमिनाथ बारहमासा” को पहला बारहमासा ग्रंथ माना जाता है।
4 डिंगल शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग प्रसिद्ध कवि ओसिया बांकीदास ने अपनी रचना कुकवि बतीसी (1871 वि.स.) में किया है।
5 राजस्थानी गद्य का प्रारम्भ 13वीं शताब्दी से माना जाता है तथा संवत 1330 में लिखित आराधना नामक टिप्पणी को प्राचीन राजस्थानी गद्य का सर्वप्रथम नमूना माना जाता है।
6 राजस्थानी गद्य का प्रौढ़ रूप 15वीं शताब्दी में विकसित हुआ। संवत् 1411 में आचार्य तरुण प्रभू सूरि लिखित “षड़ावश्यक बालावबोध” को राजस्थानी गद्य की सर्वप्रथम प्रौढ़ कृति माना जाता है।
7 राजस्थानी उपन्यास, नाटक और कहानी के प्रथम लेखक शिवचन्द्र भरतिया माने जाते है। उनके द्वारा लिखित “केसर विलास” (1900) को राजस्थानी का प्रथम नाटक, “विश्रांत प्रवास” (1904) को राजस्थानी में प्रथम कहानी और “कनक सुन्दर” (1903) को प्रथम राजस्थानी उपन्यास माना जाता है।
8 चन्द्रसिंह बिरकाली की रचना “बादली” को आधुनिक राजस्थानी की प्रथम काव्याकृति माना जाता है।
9 स्वतंत्रता के उपरांत 1956 में लिखा गया श्रीलाल नथमल जोशी का उपन्यास आभैपटकी स्वातंत्रयोत्तर काल का प्रथम उपन्यास माना जाता है।
10 1944 में दिनाजपुर में राजस्थानी साहित्य सम्मेलन का आयोजन किया गया था। जो राजस्थानी का प्रथम सम्मेलन माना जाता है। मेघराज मुकुल ने इसी सम्मेलन में प्रथम बार अपनी कविता “सैनाणी” का काव्य पाठ किया था।
11 नारायण सिंह भाटी रचित “दुर्गादास’ (1956)मुक्त छंद में रचित राजस्थानी भाषा की पहली सशक्त और प्रौढ़ काव्य कृति मानी जाती है।

NOTES


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