प्रश्न 1 : नीति निर्देशक तत्वों की उपादेयता बताइये।
उत्तर : ये भारतीय संघ के सभी अधिकृतों हेतु अनुदेशों की तरह है तथा ये उन्हें नए सामाजिक व आर्थिक व्यवस्था के मूल सिद्धान्तों की याद दिलाते है।
ये न्यायालयों की न्यायिक समीक्षा की शक्ति के प्रयोग मे सहायता करते है। ये प्रस्तावना को विस्तृत रूप देते है जिनसे भारत के नागरिकों की न्याय, स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व के प्रति बल मिलता है। ये मूल अधिकारों के पूरक है तथा भाग-3 में, सामाजिक व आर्थिक अधिकारों की व्यवस्था करते हुए रिक्तता की पूरा करते है। अतः इनके क्रियान्वयन द्वारा व्यक्ति मूल अधिकारों का पूर्णतः उपयोग कर पाता है। ये विपक्ष को सरकार पर नियंत्रण व प्रभाव बनाने में सक्षम बनाता है यदि सरकार के कार्य निदेशक तत्वों के विरूद्ध हो। 0 लोग इन निर्देशों के आलोक में सरकार के प्रदर्शन का परीक्षण कर सकते है। ये आम राजनीतिक घोषणापत्र की तरह होते है।

प्रश्न 2 : न्यायिक सक्रियता से आप क्या समझते है?
उत्तर : जब न्यायपालिका, कार्यपालिका पर प्रभावी निगरानी रखे और सरकारी नीतियों एवं संसदीय कानूनों में प्रभावी बदलावों को कार्यान्वित करती है। सकारात्मक रूप में न्यायपालिका, कार्यपालिका एवं विधायिका को बेहतार कार्य हेतु प्रेरित करती है, उदाहरण- जनहित याचिका। लेकिन जब न्यायपालिका स्वयं ही विधायी (कानून निर्माण) एवं कार्यकारी कार्य करना शुरू कर दे तो यह न्यायिक अतिसक्रियता या नकारात्मक न्यायिक सक्रियता कहलाती है, उदाहरण- दिल्ली में डीजल वाहनों पर अतिरिक्त करारोपण। हाल के समय में नकारात्मक न्यायिक सक्रियता अधिक देखी जा रही है।

प्रश्न 3 : राजस्थान में निर्वाचन व्यवहार को प्रभावित करने में जाति की भूमिका
उत्तर : आजादी के पश्चात सामन्ती जातियों में (राजपूत) में कांग्रेस के प्रति विरोध था तथा जमींदारी व्यवस्था के उन्मुलन के कारण किसान जातियों ने कांग्रेस का समर्थन किया। SC/ST जातियों ने संवैधानिक उपबन्धों के कारण कांग्रेस को समर्थन दिया। जातिगत संस्थाएँ दबाव समूह की तरह बनी तथा राजनीतिक लाभों के लिए विभिन्न दलों का समर्थन व विरोध किया। चौथी विधानसभा में अजगर फॉर्मुला अपनाया गया जिसमें अहीर, जाट, गुर्जर, व राजपूत जातियाँ 2003 विधानसभा में वसुंधरा सरकार ने जातिगत समीकरणों के आधार पर राज्य की राजनीति को प्रभावित किया। हालांकि शैक्षणिक विकास के साथ-साथ इस प्रभाव में कमी आती जा रही है।

SUBJECT QUIZ

प्रश्न 4 : केन्द्र-राज्य आयोग पर सरकारिया आयोग की मुख्य सिफारिशें बताइये।
उत्तर : अनुच्छेद 263 के तहत एक स्थायी अंतर्राज्यीय परिषद् का गठन होना चाहिए।
अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) की बहुत संभलकर इस्तेमाल किया जाए।
अखिल भारतीय सेवाओं को अधिक मजबूत बनाना चाहिए तथा ऐसी ही कुछ सेवाओं का निर्माण किया जाना चाहिए।
कराधान की शक्ति संसद में निहित रहनी चाहिए तथा अन्य शक्तियों को समवर्ती सूची में शामिल किया जाना चाहिए।
जब राष्ट्रपति राज्य के किसी विधेयक को स्वीकृति हेतु रखे तो इसका कारण राज्य सरकार को बताया जाना चाहिए।
राज्यपाल विधानसभा में बहमत की स्थिति में सरकार को भंग नहीं कर सकता।
बिना संसद की अनुमति के किसी राज्य मन्त्री के विरूद्ध जांच आयोग नहीं बैठना चाहिए।
केन्द्र को बिना राज्यों की स्वीकृति के सैन्य बलों की तैनाती की शक्ति प्राप्त हो

प्रश्न 5 : भारतीय संविधान में राज्यसभा को प्राप्त विशेष शक्तियाँ कौनसी है?
उत्तर : संघीय चरित्र होने के कारण राज्यसभा को दो विशेष शक्तियाँ दी गई है जो लोकसभा के पास नहीं है
अनुच्छेद 249- यह संसद को राज्यसूची में से विधि बनाने हेतु अधिकृत कर सकती है।
अनुच्छेद 312- यह संसद की केंद्र व राज्य दोनों के लिए नयी अखिल भारतीय सेवा के सृजन हेतु अधिकृत कर सकती है।
अनुच्छेद 67- उपराष्ट्रपति को पद से हटाने की प्रक्रिया केवल राज्यसभा में ही शुरू की जा सकती

प्रश्न 6 : भारतीय संविधान का आधार एकात्मक है। विवेचन कीजिए।
उत्तर : भारतीय संविधान में संघात्मक विशेषताएं जैसे द्विसदनात्मक व्यवस्था एवं शक्ति पृथ्थकरण तथा एकात्मक विशेषताएँ जैसे शक्तिशाली केन्द्र व आपातकालीन प्रावधान दोनों मौजूद हैं। बोम्मई वाद (1994) में सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान को संघात्मक माना तथा संघात्मक व्यवस्था को इसका मूल ढांचा माना। सरकारिया एवं पुछी आयोग ने भी इसे संघात्मक माना है। बी.आर. अम्बेडकर के अनुसार सामान्य स्थिति में यह संघात्मक है लेकिन आपातकाल में यह एकात्मक हो जाता है। अन्ततः हम कह सकते हैं कि एकात्मक एवं संघात्मक दोनों विशेषताओं की उपस्थिति इसे अर्द्ध-संघीय प्रदान करती है।
हैं

प्रश्न 7 : भारतीय निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए संविधान में प्रदत उपबंध बताइये।
उत्तर : मुख्य निर्वाचन आयुक्त को अपनी निर्धारित पदावधि में काम करने की सुरक्षा है।
उसे उसके पद से उसी रीति से व उन्हीं आधारों पर ही हटाया जा सकता जैसे उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को अन्यथा नहीं।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सेवा की शर्तों में उसकी नियुक्ति के पश्चात् अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
अन्य निर्वाचन आयुक्त या प्रादेशिक आयुक्त की मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश पर ही हटाया जा सकता है।
ये प्रावधान निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता व निष्पक्षता को सुनिश्चित तथा संरक्षित करते है।

CURRENT AFFAIRS

प्रश्न 8 : 42वाँ संविधान संशोधन
उत्तर : 1976 में हुआ यह संशोधन आजतक का सबसे व्यापक संशोधन है जिसे लघु संविधान भी कहा जाता है।
संविधान में समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखण्डता शब्द जोड़े गए।
मूल कर्तव्यों को समाहित किया (भाग-IVक) – राष्ट्रपति के लिए मंत्रिमण्डल की सलाह को अनिवार्य बनाया।
2001 तक लोकसभा एवं राज्य विधायिकाओं में सीटों की संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर स्थिर कर दी गई।
संविधान संशोधन पर न्यायपालिका की शक्ति को सीमित किया।
न्यायिक पुनरावलोकन एवं रिट क्षेत्राधिकार में कटौती।
मूलअधिकारों के उल्लंघन के आधार पर नीति निर्देशक तत्वों को लागू करने हेतु निर्मित कानूनों को वैध माना गया।
संघ के किसी भाग में आपात की उद्घोषणा को सरल/संभव बनाना इत्यादि इसके प्रमुख बिन्दु थे

प्रश्न 9 : केन्द्रीय सतर्कता आयोग का संगठन एवं प्रमुख कार्य बताइये।
उत्तर : एक केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त व दो या दो से कम सतर्कता आयुक्त होते है। सीवीसी का अपना स्वयं का सचिवालय होता है जो सचिव, संयुक्त सचिवगण, उपसचिवगण, आदि से मिलकर बना होता है। इसकी एक मुख्य तकनीकी शाखा होती है जो मुख्य अभियंता तथा सहायक स्टॉफ से बनी होती है। विभागीय पड़ताल हेतु इसकी एक विभागीय शाखा भी होती है।
कार्य :
केन्द्र सरकार के निर्देश पर ऐसे सिविल सेवक की जाँच करना जिसने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत अपराध किया हो।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत की गई जांच में सीबीआई की कार्यप्रणाली पर नजर रखना।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने हेतु संबंधित प्राधिकरणों को दिए गए लंबित प्रार्थना पत्रों की समीक्षा करना।

NOTES

प्रश्न 10 : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में स्थाई सदस्यता भारत के दावे को आधार प्रदान करने वाले कारक बताइये।
उत्तर : कारक :
भारत संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य था।
मानव जनसंख्या के 1/6 भाग का प्रतिनिधित्व करने वाला विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र।
यू.एन. के शांति मिशन में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता 07 बार सुरक्षा परिषद् की सेवा कर चुका है।
6th सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तथा दूसरी सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था।
भारत ने अन्तर्राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा बनाए रखी है।
धार्मिक/ साम्प्रदायिक सौहार्द को प्रोत्साहित करने हेतु कार्य किया।
जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, सतत विकास आदि समस्याओं के समाधान में सक्रिय रूप से संलग्न।

प्रश्न 11 : POCSO अधिनियम में वर्णित मुख्य अपराध बताइये।
उत्तर : POCSO अधिनियम उन सभी लोगों को दण्डित करता है जो निम्नलिखित अपराधों में संलिप्त हैं
प्रवेशन लैंगिक हमला (धारा-3)
गुरूत्तर प्रवेशन लैंगिक हमला (धार-6)
लैंगिक हमला (धारा-7) – गुरूत्तर लैंगिक हमला (धारा–9)
यौन उत्पीड़न (धारा-11) 0 अश्लील चित्रण (धारा-13)

प्रश्न 12 : शीतयुद्धोत्तर दौर में विश्व व्यवस्था में विकसित नए रूझान क्या हैं?

उत्तर : नए रूझान :-
यू.एस.ए के एकमात्र शक्ति के रूप में एकधुवीय विश्व का निर्माण, अब बहुध्रुवीयता की ओर प्रगतिशील रूप से अग्रसर
वैश्विक स्तर पर पूंजीवाद को अपनाया गया।
वैश्विकरण । परस्पर आर्थिक निर्भरता में वृद्धि
संचार क्रांति ने विश्व को एकीकृत किया।
जलवायु परिवर्तन, वैश्विक आंतकवाद, साइबर अटैक, क्रिप्टो करेंसी जैसी नई समस्याओं का आगमन ।
दक्षिण-दक्षिण सहयोग में धीमी प्रगति
गुट-निरपेक्ष आन्दोलन की प्रासंगिकता पर प्रश्नचिन्ह

ONE LINER QUESTION ANSWER

प्रश्न 13 : भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र सहयोग पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर : भारत-यू.एस. रक्षा संबंध रक्षा तकनीक एवं व्यापार पहल रूप में नवीनीकृत (2015) रक्षा फ्रेमवर्क समझौते (2005) द्वारा प्रोत्साहित किए गए जो रक्षा व्यापार पर ध्यान केन्द्रित (अब लगभग 15 बिलियन डॉलर का व्यापार, सी-130 हरक्यूलस, C-17 ग्लोबमास्टर, अपाचे, चिनूक एयरक्राफ्ट के साथ ) करता है। भारत 22 गार्जियन ड्रोन खरीद रहा है तथा सामरिक व्यापार प्राधिकरण का दर्जा-1 (SAT-1) प्राप्त किया है। भारत ने 3 आधारभूत समझौतों GSOMZA (2002), LEMOA (2016) तथा COMCASA (2018/ हाल ही में 2+2 वार्ता में) पर हस्ताक्षर किए है। बी.ई.सी.ए. अभी भी हस्ताक्षरित करना शेष है। मालाबार युद्धाभ्यास भी प्रगाढ़ सहयोग को दर्शाता है।

प्रश्न 14 : BRICS की प्रासंगिकता पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर : विश्व की 41% जनसंख्या और 22% जी.डी.पी. का प्रतिनिधित्व करने वाला ब्रिक्स 5 विकासशील देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन तथा दक्षिण अफ्रीका) का एक ऐसा मंच है जो बहुध्रुवीयता के लिए मार्ग तय कर रहा है। न्यू डवलपमेन्ट बैंक तथा आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (2014) की स्थापना से आई.एम. एफ को सुधारों की लागू करने हेतु मजबूर किया है तथा वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था प्रदान की है। नियमित सम्मेलनों का आयोजन करना, आतंकवाद का मुकाबला, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, व्यापार, क्रेडिट राशनिंग आदि क्षेत्रों में सहयोग ने ब्रिक्स की प्रासंगिकता को सिद्ध किया है।

प्रश्न 16 : सोलर चरखा मिशन
उत्तर : सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों की महत्वपूर्ण आर्थिक भूमिका (देश के लगभग 60% रोजगार व 10% वृद्धि में योगदान ) को चिन्हित करते हुए 27 जून 2018 (एम.एस.एम.ई दिवस) को उद्योग संगम में राष्ट्रपति द्वारा शुरू किया गया मिशन। योजना का उद्देश्य देश की 5 करोड़ महिलाओं को इस पहल से जोड़ना है। आरम्भिक 2 सालों में 1 लाख नौकरियाँ सृजित होने की उम्मीद है। सरकार योजनान्तर्गत शुरूआती दो वर्षों में 50 क्लस्टर (एम.एस.एम.ई क्षेत्र के ) के लिए 550 करोड़ रूपये की सब्सिडी देगी(प्रत्येक समूह में 400 से 2000 कारीगर होगें) जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उत्पन्न होगा और हरित अर्थव्यवस्था के निर्माण में सहायता मिलेगी।

प्रश्न 17 : सामान्यज्ञ-विशेषज्ञ विवाद के मुख्य बिन्दु क्या है? इनके मध्य स्वस्थ संबंध हेतु कौन-कौन से उपाय सहायक हो सकते हैं?
उत्तर : विवाद के मुख्य बिन्दु :
सामान्यज्ञों को प्राप्त वेतन, पदोन्नति व अन्य सुविधाएँ विशेषज्ञों की तुलना में अधिक है।
बिना किसी तकनीकी ज्ञान के सामान्यज्ञ नीति व कार्यक्रम बनाते हैं। जिन्हें विशेषज्ञों को क्रियान्वित करना पड़ता है।
सामान्यज्ञों का व्यवहार निरंकुश नौकरशाह जैसा
विशेषज्ञों के निर्धारित पदों पर सामान्यज्ञं का वर्चस्व व सामान्यज्ञों द्वारा विशेषज्ञों को अधीनस्थ मानकर व्यवहार करना।
स्वस्थ संबंध हेतु सुझाव :
एकीकृत पदसोपानिक व्यवसथा को अपनाया जाए भारतीय संघ सेवा का गठन।
यह पूर्व निर्धारित हो कि किस विभाग का प्रधान अधिकारी सामान्यज्ञ होगा
नई अखिल भारतीय सेवाओं का गठन – चिकित्सा, शिक्षा, कृषि आदि।
दोनों को एक जगह प्रशिक्षण- सचिवालय, निदेशालय को एकीकृत कर दिया जाए।
1st ARC के अनुसार इन्हें कार्यात्मक व गैर कार्यात्मक सेवाओं में विभाजित किया जावे

प्रश्न 18 : कमिश्नरेट व्यवस्था से आप क्या समझते है? क्या आप मानते हैं कि इस व्यवस्था ने जिला कलेक्टर की स्थिति को कमजोर किया है?
उत्तर : कमिश्नरेट व्यवस्था से तात्पर्य उस पुलिस व्यवस्था से है जिसमें संबंधित शहर की पुलिस व्यवस्था परंपरागत पुलिस अधीक्षक के बजाय पुलिस आयुक्त को सौंप दी जाती है। पुलिस आयुक्त के पास जिला दंडनायक वाली शक्तियाँ, CRPC की धारा 107-124, 133, 134, 135, 144, 144A की शक्तियां शस्त्र अधिनियम के तहत लाइसेंस देने, शहर में कयूं लगाने, मजिस्ट्रट संबंधी शक्तियां आदि होती है। यह कहना उचित नहीं होगा की कलेक्टर की स्थिति कमजोर हुई है बल्कि कलेक्टर की स्थिति कम होने से वे विकास कार्यों में अधिक ध्यान दे पाएंगे व पुलिस शीघ्र त्वरित, निष्पक्ष ढंग से कानून व्यवस्था से संबंधी चुनौतियों का समाधान निकालेगी।

प्रश्न 19 : राज्य वित्त आयोग के मुख्य कार्य गिनाते हुए समझाइए की क्या यह संस्था केवल कागजी संस्था है?
उत्तर : राज्य वित्त आयोग का गठन अनुच्छेद 243 1 व 243 II के तहत 5 वर्ष हेतु किया जाता है।
कार्य :- स्थानीय निकायों को वित्त आवंटन हेतु सिद्धांत व पद्धति का निर्धारण करना।
कर, ड्यूटी, टोल, फीस आदि का राज्य व स्थानीय निकायों में बंटवारा स्थानीय निकायों द्वारा लगाए जाने वाले कर, चूंगी, फीस आदि का निर्धारण करना।
राज्य की संचित निधि से स्थानीय निकायों को अनुदान संबंधी सिफारिश
स्थानीय निकायों की वित्तीय सुदृढ़ता संबंधी उपाय सुझाना
चूँकि यह परामर्शदात्री निकाय है अतः राज्य सरकार द्वारा इनकी सिफारिशों को गंभीरता से नही लिया जाना वहीं, इसकी स्थिति संघीय वित्त आयोग की तुलना में कमजोर होने के कारण इसे कागजी संस्था कहा जाता है। अतः राज्य को सहाकरी संघवाद व विकेन्द्रीकरण की संवैधनिक भावना को साकार करने हेतु वित्त आयोग की सिफारीश को महत्व देना चाहिए।

प्रश्न 20 : गुलिक के POSDCORB सिद्धांत की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।
उत्तर : P- Planning (नियोजन) – संसाधनों को ध्यान में रखकर योजना बनाना।
O-Organising (संगठित करना)- मानव श्रमशामिधन, तकनीक, कच्चा माल को व्यवस्थित करना।
S-Staffing (कर्मिकों की व्यवस्था)- कार्मिकों की भर्ती, प्रशिक्षण, वेतन, पदोन्नति, स्थानांतरण की व्यवस्था करना।
D-Directing (निर्देश देना)- उच्चाधिकारी द्वारा अधीनस्थों को निर्देश व मार्गदर्शन प्रदान करना।
co- Co-ordinating (समन्वय करना)- संगठन में विभिन्न इकाइयों, व्यक्तियों, कार्यों के मध्य समन्वय
R- Reporting (प्रतिवेदन)- प्रत्येक अधीनस्थ उच्चाधिकारीयों को कार्य की प्रगति, बाधा, सफलताओं से अवगत करवाए।
B-Budgeting – संगठन में आय व व्यय का हिसाब लगाना।
निष्कर्षतः POSDCORB को केवल प्रबंधकीय प्रकृति का होना, लोकप्रशासन के मुख्य कार्य का अभाव मानवीय तत्वों के POSDCORB के अभाव आदि बिन्दुओं के आधार पर आलोचना की जाती है।

प्रश्न 21 : नियंत्रण का क्षेत्र अवधारणा क्या है? नियंत्रण के क्षेत्र का दायरा वर्तमान में किस प्रकार विस्तृत हुआ है, समझाइए।
उत्तर : नियंत्रण का क्षेत्र अवधारणा से तात्पर्य किसी नियंत्रण कर्ता अधिकार/उच्चाधिकारी के ध्यान के उस क्षेत्र से है जिसके अन्तर्गत वह अधीनस्थों को सफलतापूर्वक नियंत्रित कर सकता है। ग्रेम्युनास ने इसे ध्यान का क्षेत्र’ भी कहा है। वर्तमान में विभिन्न कार्यालयों में स्वचालन मशीनों के बढ़ते प्रभाव,(CCTV, E-Mail, विडियोकाँफ्रेंसिंग, पेजर, इंटरनेट ), तकनीकी व विशेषज्ञ संस्थाओं के उदय, स्टाफ अभिकरणों के बढ़ते प्रभाव, आधुनिक नियंत्रण तकनीकों ( MIR/PERI) आदि ने नियंत्रण के क्षेत्र में बदलाव किया है।

प्रश्न 23 : मुलायम ऊतक की चोटों के बारे में लिखते हुए RICE तकनीक का वर्णन कीजिए।
उत्तर : मुलायम उत्तकों की चोट : –
कनट्यूशन (नील पड़ना) : माँसपेशियों की चोट, सूजन आ जाना एवं दर्द इसके लक्षण है।
स्प्रेन (मोच): अस्थिबंधों पर जोर पड़ने से (मुख्यतः कलाई एवं टखने के जोड़ों में) यह चोट लगना
स्ट्रेन (खिंचाव) : माँसपेशियों की चोट ; भारी वजन उठाने से इस प्रकार की चोट लगती है।
RICE तकनीक :
R : REST (आराम) खिलाड़ी को चोट लगने पर आराम करना चाहिए।
I : ICE (बर्फ)– सूजन व दर्द कम करने के लिए बर्फ का प्रयोग करें।
C: Compression (दबाव)- दर्द (सूजन) कम करने के लिए चोट वाले अंग को हल्के हाथों से दबाकर रखे।
E : Elevate – सूजन कम करने के लिए अंग को हृदय के स्तर से उपर उठाकर रखें।

प्रश्न 24 : यौगिक अभ्यास के उद्देश्य क्या हैं? धनुरासन एवं वृक्षासन के दो-दो लाभ लिखिए।
उत्तर : यौगिक अभ्यास के उद्देश्य : – यौगिक क्रियाओं की समझ विकसित कर इसे जीवन में प्रयोग में लाना।

  • व्यक्ति में स्वस्थ जीवनशैली का विकास करना।
    -व्यक्ति में मानवीय मूल्यों का विकास करना।
    -व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक भावनात्मक स्वस्थता सुनिश्चित करना।
    धनुरासन के लाभ :
    मधुमेह को ठीक करने में सहायक है।
    झुके हुए एवं कूबड़ कंधों को ठीक करने में सहायक है।
    वृक्षासन के लाभ :
    शरीर के संतुलन एवं समन्वय को सुधारता है।
    रक्त प्रवाह को सुधारता है।

प्रश्न 25 : क्या राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत लाया जाना चाहिए।
उत्तर : विपक्ष में तर्क :
ये सरकारी निकायों के रूप में स्थापित नही है
सरकार ने यह भी कहा कि सीआईसी ने आर. टी. आई की उदार व्याख्या की है जिसने गलती से उन्हें सार्वजनिक प्राधिकरण करार दिया था।
DPT ने भी एक हलफनामें में कहा था कि आरटीआई के अधिनियमन करते समय राजनीतिक दलों को इसमें रखने की कल्पना कभी नहीं की गई।
निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के द्वारा राजनीतिक दलों की समस्त सूचनाएं पहले से ही सार्वजनिक है।
विपक्ष में तर्क :
क्योंकि सता में रहते हुए वे कर के पैसे को नियन्त्रित करते है अतः जांच हेतु उन्हें खुला/पारदर्शी होना चाहिए
राजनीतिक दलों में वितीय अनियमिततओं को जांचने में निर्वाचन आयोग सक्षम नहीं है।
सीआईसी के आदेशों की पूर्णतः अवहेलना नहीं की जा सकती
लोगों का दलों में विश्वास कम हो रहा है
राजनीतिक दल लोकतंत्र के अभिन्न अंग व सार्वजनिक संसाधनों के न्यासी है।
अतः निष्कर्षतः हम कह सकते हैं कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने हेतु तथा भ्रष्टाचार को कम करने हेतु राजनीतिक दलों को आरटीआई की परिधि में लाना चाहिए।

प्रश्न 26 : साइबर अपराधों को नियंत्रण हेतु कौनसे उपाय किए जाने चाहिए।
उत्तर : कुछ सामान्य उपाय निम्न हो सकते है
क्षेत्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अधिक केंद्रीकृत सहयोग कानून प्रवर्तन एजेंसी, सेना, निजी क्षेत्र, शिक्षा, प्रयोक्ता समूह आदि भागीदारों को शामिल कर एकटास्क फोर्स का गठन किया जाए।
इंटरनेट सुरक्षा संगठनों व वितीय सेवा प्रदाताओं के मध्य सक्रिय सहयोग
साइबर अपराधों को सुविधाजनक बनाने वाली मेजबान कंपनियों व मालवेयर, रूटकिट आदि को प्रसारित करने वाले भूमिगत फोरमों को ध्वस्त करने हेतु सरकार व कानून प्रवर्तन एजेंसियों की संयुक्त कार्यवाही
आई.टी. एक्ट 2000 का प्रभावी क्रियान्वयन
साइबर अपराधों को नियंत्रित करने हेतु केरल के वेबपोर्टल व कॉल सेन्टर जैसी और पहले
राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति आदि का प्रभावी क्रियान्वयन

प्रश्न 27 : आईजेक के व्यक्तित्व के शीलगुण सिद्धांत को समझाइये।
उत्तर : आइजेक ने जैविक व आनुवांशिक आधार पर व्यक्तित्व को दो आयामों में वर्गीकृत किया है
तंत्रिका तापिता बनाम सांवेगिक स्थिरता :- से तात्पर्य है कि लोगों का किस सीमा तक अपनी भावनाओं पर नियंत्रण होता है। इसके एक छोर पर तंत्रिका ताप से ग्रस्त लोग है जिनमें दुश्चिंता, बैचेनी पाई जाती है व दुसरी और शांत व नियंत्रित लोग है।
बर्हिमुखता बनाम अन्तर्मुखता :- से तात्पर्य है कि लोगों में किस सीमा तक सामाजिक उन्मुखता/सक्रियता विमुखता/ निष्क्रियता पाई जाती है। इसके पश्चात् तीसरा आयाम मनस्तापिता बनाम सामाजिकता प्रस्तावित किया जिसमें मनस्तापिता के आभाव पर उच्च अंक प्राप्त करने वाले व्यक्ति के आक्रामक, अहमकेन्द्रित समाज विरोधी होने की संभावना होती है।

प्रश्न 28 : योगा का हमारे लिए बहुविमीय महत्व समझाइए।
उत्तर : योग के महत्व –

  • मानसिक महत्व :- यह तनाव को दूर कर एकाग्रता व सहनशक्ति को बढ़ता है।
  • शारीरिक महत्व :- शारीरिक शुद्धता, सौन्दर्यवर्द्धन, रोगों से बचाव, मांसपशियों के विकास, प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि तथा लचक विकसित करने में सहायक है उदाहरण – मण्डूकासन एवं वजासन मधुमेह के लिए फायदेमन्द ।
  • आध्यात्मिक महत्व :- ध्यान व आध्यात्मिक गुणों का विकास तथा नैतिक एवं आचारिक मूल्यों को बढावा मिलता है।
  • सामाजिक महत्व :- सामाजिक गुणों को विकसित करने में सहायक है जिससे सामाजिक सम्बन्धों के विकास में सहायता मिलती है।

प्रश्न 29 : “उपखण्ड अधिकारी जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण कड़ी हैं।” विवेचना कीजिए।
उत्तर : SDO के मुख्य कर्तव्य व कार्य :
भू-राजस्व अधिकारी के रूप में :- ग्रामवार नक्शे बनवाना, सीमांकन, भू-राजस्व संग्रहण, उपखंड की रिपोर्ट कलेक्टर को देना, अतिक्रमण रोकना, तहसीलदार, नायबतहसिलदार, पटवारी, गिरदावर को निर्देशित करना, उपखंड की फसल का आकलन।
उपखंड दंडनायक के रूप में :- उपखंड में शांतिव्यवस्था बनाना, 144 लागू करना, पुलिस चौकियों का निरीक्षण, पुलिस थानों व जेलों का निरीक्षण (उपखण्ड क्षेत्र में)
न्यायिक अधिकारी के रूप में :- भूमिसीमा विवाद, चारागाह विवाद, वन उपज अपवर्जन विवाद, भू-राजस्व विवाद, भू-राजस्व अधिनियम : 1956 के अधीन विक्रय व नीलामी विवाद, उतराधिकार विवाद।
प्रशासनिक कराधिकारी के रूप में :- उचित मूल्य दूकान, अस्पताल, विद्यालयों का निरीक्षण राजस्व अभियानों में जन अभियोग व सतर्कता साक्ष्य का निरीक्षण करना।

प्रश्न 30 : टिप्पणी कीजिए 1. दल की भावना (एस्प्रिट दे कॉर्पस) 2. कार्यात्मक फॉरमेनशिप
उत्तर : दल की भावना :– फेयोल के अनुसार संगठन में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को दल की से कार्य करना चाहिए तथा संगठन के प्रत्येक कर्मचारी को स्वयं को संगठन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानकर कार्य करना चाहिए। यह भावना संगठन में संगठनात्मक उद्देश्यों को प्राप्त करने संगठन की समान में वृद्धि व कार्मिकों के लिए अज्ञिप्रेरणा का कार्य करती है।
कार्यात्मक फॉरमेनशिप :- टेलर ने कार्यात्मक फोरमेनशिप के माध्यम से श्रमिक हेतु आठ विशेषीकत पर्यवेक्षक निर्धारित किए। जिसमें प्रथम चार पर्यवेक्षक ऑर्डर ऑफ वर्क एंड कट, इन्सट्रक्सन, कार्डक्लर्क, टाईम व कास्टक्ल्र्क, कारखाना अनुशासक योजना निर्माण करते है वे गेंगबास, रिपेयर बोस स्पडनकन इंसपेक्टर योजना क्रियान्वयन संबंधी कार्य करते है।

प्रश्न 31 : घरेलु हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत विभिन्न राहत आदेशों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : घरेलु हिंसा अधिनियम 2005 के अन्तर्गत पीड़ित व्यक्ति को निम्नलिखित राहत आदेश प्राप्त होते है
संरक्षण आदेश (धारा-18)– प्रतिवादी को किसी घरेलू हिंसा कृत्य को करने , आश्रित व्यक्ति के साथ हिंसा करने व संपति हस्तान्तरण करने को निषिद्ध किया जाता है।
निवास आदेश (धारा-19)- व्यथित व्यक्ति को साझी गृहस्थी में रहने का अधिकार प्रदान करवाना।
मौद्रिक राहत आदेश (धारा-20)– व्यथित व्यक्ति के उपगत व्यय व हानियों की पूर्ति तथा व्यथित व्यक्ति एवं उसकी संतान के लिए भरण पोषण व्यय की पूर्ति।
अभिरक्षा आदेश (धारा-21)– व्यथित व्यक्ति को संतान की अभिरक्षा दी जा सकती है।
प्रतिकार आदेश (धारा-22)- मानसिक यातना और भावनात्मक कष्ट के लिए।

प्रश्न 32 : भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के कर्तव्यों एवं शक्तियों का उल्लेख कीजिए|
उत्तर : (a) लेखा परीक्षा-
भारत एवं सभी राज्यों की संचित निधि, आकस्मिकता एवं लोक लेखा से होने वाले व्ययों की।
विधानसभा वाले केन्द्रशासित प्रदेश के सभी व्यय लेखा
केन्द्र व राज्य सरकार के किसी विभाग के सभी ट्रेडिंग, विनिर्माण लेखों, तुलनपत्रों व आनुषंगिक व्ययों की लेखा
केन्द्र व राज्यों की प्राप्तियां व व्यय
सरकार द्वारा अनुदानित निकाय व प्राधिकरण, सरकारी कंपनियों के प्राप्तियों व व्ययों के लेखा
राष्ट्रपति व राज्यपाल मांगे गए अन्य प्राधिकरण के लेख।
(b) राष्ट्रपति को लेखों के प्रारूप की सलाह
(c) अनुच्छेद 151 केन्द्र सरकार के लेखों की रिपोर्ट राष्ट्रपति को व राज्य सरकार के लेखों की राज्यपाल को देता है
(d) अनुच्छेद 279 – किसी कर या शुल्क के शुद्ध आगमों का निर्धारण व प्रमाणन।
(e) संसद की लोक लेखा समिति के मित्र व मार्गदर्शक
(f) राज्य सरकार के लेखाओं का संकलन व अनुरक्षण
(g) राष्ट्रपति को प्रतिवेदन- विनियोग लेखा, वित लेखा व सरकारी उपक्रमो की लेखा परीक्षा रिपोर्ट।

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प्रश्न 33 : अर्पित क्या है? टिप्पणी कीजिए।
उत्तर : एनुअल रिफ्रेशर प्रोग्राम इन टीचिंग (ARPIT) – स्वयं प्लेटफार्म का प्रयोग कर रहे 15 लाख उच्च शिक्षण संकायों के ऑनलाइन व्यावसायिक विकास की पहल है। इसके लिए 75 विषय विशिष्ट संस्थानों को नेशनल रिसोर्स सेन्टर के रूप में अधिसूचित किया गया है। ये विभिन्न विषयों के नवीनतम विकास, नव प्रवृतियों व संशोधित पाठ्यक्रम पर केन्द्रित ऑनलाइन ट्रेनिंग मटिरियल तैयार करेंगे। यह एक 40 घंटे का माड्यूल (20 घण्टे वीडियो व 20 घण्टे नॉन विडियो) होगा। पाठ्यक्रम के अन्त में टर्मिनल मूल्यांकन होगा इस कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले संकाय को प्रमाणपत्र प्रदान किये जायेंगे।

प्रश्न 34 : राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम में वर्णित अधिकार अभिलेख की अंर्तवस्तु के बारे में बताइये।
उत्तर : राज्य सरकार द्वारा विदीत रीतियों के अनुसार अधिकार अभिलेख तैयार किये जाते हैं- जिसमें निम्नलिखित रजिस्टर सम्मिलित हैं- धारा(114)
खेवट- सर्वेक्षण तथा अभिलेख कार्य के अधीन समस्त भू सम्पतिधारकों का ऐसा रजिस्टर होता है जिसमें प्रत्येक भू–सम्पतिधारी, उनके सहभागीदारों, कब्जाधारियों, बन्धकदारों तथा उसमें काश्तकार के अतिरिक्त अन्य प्रकार के भूमि धारण करने वालों के हित विनिदिष्ट किये जाते हैं।
खतौनी- ऐसा रजिस्टर जिसमें सर्वेक्षण तथा अभिलेख कार्य के अधीन क्षेत्र की भूमि के काश्तकार या अन्य भूमिधारक या अधिवासित समस्त व्यक्तियों का विवरण विनिदिष्ट होता है।
माफी रजिस्टर- बिना लगान या राजस्व के भूमि धारण करने वालों का विवरण होता है।
ऐसे अन्य रजिस्टर जो विहीत किये जायें।

प्रश्न 35 : व्यक्तित्व विकास के पंच अवस्था सिद्धांत को समझाइए।
उत्तर : व्यक्तित्व या मनोलैंगिक विकास का पंच अवस्था सिद्धान्त फ्रायड द्वारा दिया गया।
मौखिक अवस्था :- नवजात शिशु की मूल प्रवृतियाँ मुख केन्द्रित होती है। शिशु मौखिक सन्तुष्टि भोजन ग्रहण करने, अंगूठा चूसने आदि से प्राप्त करता है।
गुदिय अवस्था :- दो-तीन वर्ष की आयु में बच्चा समाज की मांगों जैसे मूत्र त्याग व मल त्याग के प्रति अनुक्रिया करता है। इस आयु में बच्चे इन क्रियाओं को करने में आनन्द का अनुभव करता है।
लैंगिक अवस्था :- यह अवस्था जननांगों पर बल देती है। चार पाँच वर्ष की आय में बच्चे पुरुष व महिलाओं में भेद करने लगते है। इस अवस्था के दौरान बालक इडिपस व बालिकाएं इलेक्ट्रा मनोग्रन्थि का अनुभव करते है।
काम प्रसुप्ति अवस्था :- 7 वर्ष की आयु से यौवनावस्था तक रहती है। इस समय बालक का शारीरिक विकास होता है जबकि कामेच्छाएं निष्क्रिय होती है।
जननांगीय अवस्था :- इस अवस्था में व्यक्ति मनोलैंगिक विकास में परिपक्वता प्राप्त करता है। लोग इस अवस्था में विपरीत लिंग के साथ सामाजिक व कामाचरण संबधी तरीकों में परिपक्वता प्राप्त कर लेते हैं।


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