(पाबु, हडबू, रामदे, मांगलिया मेहा) पांचों पीर पधारियों गोगाजी में है।

1 गोगाजी :-
जन्म :- ददरेवा गाँव, चूरू।
पिता :- जेबर
माता :- बाछल
पत्नी :- केलमदे (पाबु के भाई बुढ़ोजी की पुत्री)
गुरू :- गोरखनाथ
भाई :- अर्जन-सर्जन
वंश :- चौहान।

  • महमूद गजनवी के साथ युद्ध किया। गजनवी ने इन्हें जाहरपीर
    (जिन्दापीर) कहा।
  • मुस्लिम लुटेरों से गाय छुड़ाते हुए प्राणों का बलिदान किया।
  • यह युद्ध नौहर-हनुमानगढ़ में हुआ।
    धुरमेढ़ी/गोगामेढ़ी – नोहर (हनुमानगढ़)
    शीर्षमेढ़ी – ददरेवा गांव (चूरू)।
    धुरमेढ़ी का निर्माण :- फिरोजशाह तुगलक ने करवाया।
    आकृति :- मकबरेनुमा। बिस्मिल्ला अंकित है। (शुरू करना)
    वर्तमान स्वरूप :- गंगासिंह ने किया।
    मुस्लिम पुजारी :- चायल
    गोगाजी की ओल्डी :- सांचोर, जालौर
    वाहन :- नीली घोड़ी। गोगा बप्पा कहलाती है।
    मेला :- 619 (भाद्रपद कृष्ण नवमी)
    गोगा राखड़ी :- गोगाजी के नाम की राखी हल + हाली को बांधी जाती है। *गायो व सर्पो के लोकदेवता।
    गोगाजी का थान :- खेजड़ी वृक्ष के नीचे।
  • गाँवों में गोगाजी की पूजा के समय मिट्टी का घोड़ा बनाया जाता है।
  • गोगाजी के गुरू गोरखनाथ का तपस्या स्थल “नोलाव बाग” ददरेवा (चुरू) में स्थित है।
  • ओल्डी, पोट्ठी, टापरा, झोपड़ा, खुड़ी :- कच्चे घरों के राजस्थानी भाषा में नाम है।
  • जोर्ज गियर्सन :- इसने अपने ग्रंथ लिरिस्टीक सर्वे ऑफ इंडिया में राजस्थानी बोलियों का वैज्ञानिक अध्ययन किया व राजस्थान में 84 प्रकार की बोलिया बताई।

2 रामदेवजी :- तँवर वंश से संबंध । तथा द्वारीका नाथजी का अवतार।
जन्म :- उडुकासमेर गांव, शिव तहसील (बाड़मेर)। भाद्रपद शुक्ल द्वितीय। पिता :- अजमल माता :- मेणादे
पत्नी :- नेतलदे (अमरकोट, पाकिस्तान)
भाई :- वीरमदेव
गुरू :- बालीनाथ
पंथ :- कामड़िया
ध्वजा :- नेजा
जागरण :- जम्मा
हिंदू :- कृष्णा जी का अवतार मानते है।
मुस्लमान :- राम-सा-पीर ।
मेघवाल जाति के भक्त :- रिखीया कहलाते है।
बहिन बनाया :- डाली बाई मेघवाल को।
उपनाम :- पीरो का पीर/रूणेचा रा धणी/राम सा पीर।
मंदिर :- रूणेचा, पोकरण (जैसलमेर)।
समाधि :- रामसर तालाब के पास।

SUBJECT QUIZ

  • इनके मंदिर के सामने डाली बाई (रामदेव जी से 1 दिन पूर्व समाधि ली) मंदिर स्थित है। तथा इनके पास में भेरव बावड़ी है। (रामदेवजी ने भेरव राक्षस का वध किया)
  • एकमात्र लोकदेवता जो मूर्ति पूजा के विरोधी थे। इनकी पंगलियों की पूजा होती है।
  • एकमात्र लोकदेवता जो कवि भी थे।
    इनके उपदेश/कृति :- 24 बाणिया (बाबा री पर्ची कहा जाता है) नामक ग्रंथ से सुरक्षित।
    नृत्य :- कामड़िया जाति द्वारा तेरहताली नृत्य किया जाता है।
    अन्य मंदिर :- छोटा रामदेवरा (गुजरात), मसुरिया पहाड़ी (जोधपुर), बराठिया (अजमेर), सुरतामेड़ा (चित्तौड़गढ़)।
    वाहन :- नीला घोड़ा।
    मेला :- भाद्रपद शुक्ला द्वितीय से एकादशी (साम्प्रदायिक सद्भावना)
  • इनको कपड़े से बना घोड़ा चढ़ाया जाता है।
    समाधि :- भाद्रपद शुक्ल एकादशी।
  • इन्होंने इस्लामीकरण पर रोक लगाई।
  • बाबे री बीज कहलाते है।
    मलाहो का कुल देवता :- रामदेवजी को माना जाता है।
    पर्चाबावड़ी :- बोहितराज ने बनवाया था।

3 पाबुजी :-
जन्म :- कोलुमण्ड, फलौदी (जोधपुर)
पिता :- धांधली जी राठौड़
माता :- कमलादे
पत्नी :- सुप्यारदे/फुलमदे
प्राचीनतम लक्ष्मण मंदिर :- भरतपुर।
प्रतीक चिह्न :- भाला लिये हुए अश्वारोही।

  • इन्हें मारवाड़ में ऊँट लाने का श्रेय प्रदान है।
  • ऊँट में एक विशेष रोग पाया जाता है – सर्रा।
  • ऊँट के बीमार होने पर पाबुजी की फड़ बोली जाती है व ठीक हो जाने पर नायक जाति के भोपे–भोपण के द्वारा आधा कटे नारियल से बने वाद्ययंत्र रावण हत्था के साथ पाबुजी की फड़ बांची जाती है।
    पाबु प्रकाश ग्रंथ :- आशिया मोड़जी
    पाबुजी के पावड़े :- पाबुजी के गाथा गीत माठ वाद्ययंत्र के साथ गाये जाते है। सबसे प्रसिद्ध फड़ :- पाबुजी।
    मेला :- चैत्र मास की अमावस्या
    घोड़ी :- केशर कालमी।
  • देवल चारणी की गायों को बचाते समय इनकी मृत्यु हो जाती है।
  • ऊँटों के लोकदेवता/गायों के रक्षक देवता/प्लेग रक्षक देवता कहा जाता है।

ONE LINER QUESTION ANSWER

4 हड़बुजी :-
जन्म :- भुडले गांव, नागौर
पिता :- मांगलिया मेहाजी
मौसेरे भाई :- रामदेवजी
गुरू :- बालीनाथ
गौत्र :- सांखल्या राजपूत ।

  • शकुनशास्त्र के ज्ञाता।
  • अपंग गायों के लिए बेलगाड़ी से चारा लाया करते थे।
  • भक्त इनकी पूजा बेलगाड़ी के रूप में किया करते है।
    प्रमुख स्थल :- बेंगटी गांव, फलौदी (जोधपुर)
    वाहन :- सियार
  • मारवाड़ शासक राव जोधा का संबंध इन्हीं से है।
    मांगलिया मेहाजी :-
    प्रमुख मंदिर :- बापणी गांव, जोधपुर
    मेला :- जन्माष्टमी को।
  • इनके भोपे की वंश वृद्धि नहीं होती है।
  • मेहाजी जो मांगलिक समाज के इष्ट लोक देवता है के घोड़े का। नाम “किरड़ काबरा” है।

5 तेजाजी :-
जन्म :- खड़नाल, नागौर
पिता :- ताहड़ जी “धोल्या जाट”
माता :- राजकंवर
पत्नी :- पेमलदे – पनेर (अजमेर)।
पेमलदे की सखी लाछा गुजरी (हिरा गुजरी) थी।
स्थान :- थान।
पुजारी :- घोड़ला
घोड़ी :- लीलण (सिणगारी)
कर्मस्थली :- बांसी-दुगारी
स्थान :- बुंदी
सर्पदंश :- सेन्दरिया (नाग ने डसा), अजमेर ।
मृत्यु :- सुरसुरा, अजमेर

  • मृत्यु का समाचार घोड़ी (लीलण) के द्वारा पहुंचाया जाता है।
  • सर्पो का लोक देवता/गायों का मुक्ति दाता/कृषि का उपकारक देवता/काला-बाला का देवता कहा जाता है।
    सर्वाधिक थान :- अजमेर
    मेला :- परबतसर, नागौर
    तेजा दशमी :- भाद्रपद शुक्ल दशमी।
  • सर्वाधिक कृषि के औजार इसी मेले में बिकते है।
  • राज्य सरकार को सर्वाधिक आय इसी मेले से होती है।

6 वीर कल्लाजी :- शेषनाग का अवतार।
जन्म :- सामियाना गांव, नागौर
पिता :- आससिंह/आसकरण
चाचा :- जयमल फत्ता
बुआ :- मीरा
पत्नी :- कृष्णा कँवर।
गुरू :- भेरवनाथ
कुलदेवी :- नागणेची माता।
वंश :- राठौड़।
प्रमुख पीठ :- रनेला।

  • अकबर ने इसे चार हाथों वाला लोकदेवता कहा।
  • चित्तौड़गढ़ के तीसरे साके के समय अकबर के विरुद्ध युद्ध लड़ते हुए शहीद हो गये।
  • वीर कल्ला की छतरी :- भैरव पोल पर, चित्तौड़गढ़।

NOTES

7 डुंगजी-जवाहरजी :-
डूंगजी :- बठौट-पाटोदा, सीकर का ठिकानेदार ।
वास्तविक नाम :- बलजी-भुरजी (चाचा-भतीजा)

  • गरीबों के लोकदेवता।
  • इन्होंने नसीराबाद छावनी को लुटा व धन का वितरण गरीबों में कर दिया।

8 झुंझार जी :-
जन्म :- इमलोह गांव, सीकर
प्रमुख स्थल :- स्यालदोड़ा गांव, सीकर।
प्रतिवर्ष रामनवमी को विशाल मेला लगता है।
9 भुरीया बाबा/गोतमेश्वर :-
मंदिर :- प्रतापगढ़, पाली, सिरोही।
मुख्य स्थल :- डूंगरपुर।
मेला :- वेशाख मास की पूर्णिमा।

  • मीणा जाति के इष्ट देवता।
  • शौर्य के प्रतीक।
  • पुलिस कभी भी इनके मेले में वर्दी में नहीं जाती है।

10 देवनारायण जी :-
जन्म :- गोठा-दड़ावत, आसींद (भीलवाड़ा)।
प्रमुख मंदिर :- सवाई भोज के मंदिर के रूप में प्रसिद्ध – आसीद, भीलवाड़ा। * गुर्जर जाति के अराध्य देव/विष्णु के अवतार ।
बचपन का नाम :- उदयसिंह
माता :- सैदुखटाणी
पिता :- सवाई भोज [बगड़ावत परिवार (गुर्जर)]
पत्नी :- पीपल दे
घोड़ी :- लीलागर
मेला :- भाद्रपद शुक्ल षष्ठी व सप्तमी (6-2-6-7)
अन्य मंदिर :-

  1. देवमाली – ब्यावर (समाधि)
  2. देव डुंगरी – चित्तौड़गढ़
  3. देव धाम जोधपुरिया – निवाई, टोंक।
  • इनके मंदिर में बड़ी ईंटों की पूजा की जाती है।
  • इनको छाछ-राबड़ी का भोग लगता है।
  • सबसे प्राचीन + सबसे बड़ी + सबसे छेटी फड़ (2 x 2 cm.) (1992) *राजस्थान का प्रथम लोकदेवता जिन पर डाक टिकिट जारी किया गया।

Online Examination Form

11 देवबाबा :-
गुर्जर जाति के लोकदेवता।
प्रमुख स्थल :- नगला-जहाज-भरतपुर ।
इन्हें धार्मिक विचारों के साथ पशु चिकित्सक का ज्ञान भी था।
मेला :- 125 (चैत्र शुक्ल पंचमी) व 625 (भाद्रपद शुक्ल पंचमी)
12 तल्लीनाथ जी :-
वास्तविक नाम :- गांगदेव राठौड़

  • प्रकृति प्रेमी।
  • अपना राज-पाट पुत्र को सौंपकर स्वयं सन्यासी बन गये।
    प्रमुख स्थल :- पंच मुखी पहाड़ी, पांचेटा गांव, जालौर
  • जालौर के प्रसिद्ध लोकदेवता।

13 मल्लीनाथ जी :-
जन्म :- तिलवाड़ा, बाड़मेर ।

  • इन्हीं के नाम से बाड़मेर का मालाणी प्रांत प्रसिद्ध हुआ।
  • मालाणी नस्ल की गाय व घोड़े प्रसिद्ध माने जाते है।
    घोड़ियों के प्रजनन के लिए :- आलम जी का धोरा प्रसिद्ध स्थान जो धोरी मन्ना, बाड़मेर में है।
    पत्नी :- रूपादे
    मंदिर :- रूपादे का मंदिर, माया जाल गांव, बाड़मेर। जो लोकदेवी के रूप में प्रसिद्ध है।

14 ईलो जी :- छेड़छाड़ के लोकदेवता/मारवाड़ के लोकदेवता।
प्रमुख स्थान :- जैसलमेर।
15 वीर फत्ता जी :-
प्रमुख स्थान :- साथु गांव, जालौर। इन्होंने दो बार लुटेरो से गायों की रक्षा की।
मेला :- भाद्रपद शुक्ल नवमी।
16 वीर बिग्गा जी :- जाखड़ समाज के कुलदेवता।
प्रमुख स्थल :- बिंग्गा गांव, श्री डूंगरपुर तहसील, बीकानेर ।
जाति :- जाट
पिता :- मोहन सिंह
माता :- सुल्तानी
मेला :- 14 अक्टूबर को।

17 जुंजी बाबजी :- चित्तौड़गढ़
18 केसरिया कुंवर जी :- गोगाजी के पुत्र ।

  • इनकी ध्वजा सफेद रंग की होती है।
  • ये सर्पदंस का इलाज करते है।

CURRENT AFFAIRS

19 रूपनाथ-झरड़ा :- पाबुजी के भतीजे व बुढो जी के पुत्र ।
इन्होंने जींजराव खींची को मारकर बदला लिया।
प्रमुख स्थल :- कोलुमण्ड (जोधपुर) व नौखा मण्डी, बीकानेर।
हिमाचल प्रदेश में इन्हें बालक नाथ के नाम से पूजा जाता है।
20 मामा देव :- वर्षा के लोकदेवता।
मामा देव को भैंस की बलि दी जाती है।
गांवों के प्रवेश द्वार पर इनके प्रतीक के रूप में कलात्मक तौरण रखा जाता है।


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